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जल संरक्षण

विश्व जल दिवस विशेष-5: मनरेगा से लहलहाई फसलें, बढ़ी कमाई

डाउन टू अर्थ ने मनरेगा से बदले हालात के बारे में जानने के लिए 15 राज्यों के 16 गांवों का दौरा किया। पढ़ें, मध्यप्रदेश के सीधी जिले के एक गांव की कहानी-

जल संरक्षण

विश्व जल दिवस विशेष-4: मनरेगा ने दिया पानी और बदला जीवन

डाउन टू अर्थ ने मनरेगा से बदले हालात के बारे में जानने के लिए 15 राज्यों के 16 गांवों का दौरा किया। पढ़ें, मध्यप्रदेश ...

जल संरक्षण

विश्व जल दिवस विशेष-3: क्या मनरेगा ने बदले हालात?

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा को लागू हुए 15 साल हो गए हैं। 2006 में देश के सबसे गरीब 200 ...

बूंदों की संस्कृति

विश्व जल दिवस विशेष-2: भूजल बांधों से बचाया जा सकता है पानी

भूजल बांध जमीन के अंदर बह रहे पानी को रोककर उसे भीतर ही जमा करता है

जल संकट

विश्व जल दिवस पर विशेष-1: कैसे बुझेगी प्यास

22 मार्च को विश्व जल दिवस है। इसे देखते हुए डाउन टू अर्थ प्रस्तुत कर रहा है, पानी से जुड़ी विभिन्न रिपोर्ट्स की एक ...

घर-घर नल के बावजूद पानी 8 किमी दूर

दोगी पट्टी के इन गांवों में तीसरे या चौथे दिन बमुश्किल 30 मिनट से लेकर एक घंटे तक के लिए पानी मिल रहा है, जोकि पीने लायक नहीं है

तमिलनाडु में पानी की किल्लत दूर करने के लिए आईआईटी मद्रास ने शुरु की नई पहल

फॉरवर्ड ऑस्मोसिस (एफओ) तकनीक पर आधारित इस प्रणाली की मदद से हर दिन 20 हजार लीटर साफ पीने योग्य पानी प्राप्त किया जा सकेगा

अंग्रेजों को भी हैरान करने वाली सिंचाई प्रणाली

बंगाल में पूरी तरह विलुप्त हो चुकी आप्लावन नहरों की सिंचाई व्यवस्था ने अंग्रेजों को भी चकित कर दिया था

ग्राउंड रिपोर्ट: चार धाम मार्ग और रेलवे लाइन की भेंट चढ़ गया उत्तराखंड के तीन दर्जन गांवों का पानी

विकास के साइड इफेक्ट: पहले चार धाम मार्ग परियाेजना और अब ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना ने दोगी पट्टी के गांवों में पीने का पानी का संकट खड़ा कर दिया है

नई वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट तकनीक छोटे और मध्यम स्तर के उद्यमियों के लिए फायदेमंद

इस तकनीक का उपयोग करने के लिए बहुत कम लोगों की आवश्यकता होती है और उपकरण को चलाने के लिए तकनीकी ज्ञान की भी आवश्यकता नहीं होती है

भारत में 1,169 नदियों के जरिए समुद्रों तक पहुंच रहा है हर साल करीब 126,513 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा

दुनिया भर में नदियों के जरिए हर साल 27 लाख मीट्रिक टन तक प्लास्टिक कचरा समुद्रों में पहुंच रहा है, इसके करीब 80 फीसदी हिस्से के लिए 1,000 नदियां जिम्मेवार है